बेगुसराय, मार्च 17 -- खोदावंदपुर, निज प्रतिनिधि। रमज़ानुलमुबारक तरबियत का महीना है। इसका रोज़ा तक़वा और परहेज़गारी की सीख देता है। इसलिए अल्लाह ने अपनी पसंदीदा इबादत रोज़ा को इमान वालों पर फर्ज किया। इस माह-ए-मुबारक में एक मोमिन बंदा खुदा के अहकाम व कुरान-ए-करीम के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर एक बेहतर इंसान बन सकता है। यह बात जामा मस्जिद नुरूल्लाहपुर के पूर्व इमाम मौलाना मोहम्मद मोइनुद्दीन साहब ने रमज़ानुलमुबारक के मौके पर मंगलवार को कही। उन्होंने कहा कि जहन्नम से छुटकारे वाला रमज़ान का अंतिम अशरा चल रहा है। इस अशरे में हम सभी रोज़ेदार खुदा की खास इबादत कर रज़ा-ए-इलाही हासिल करने की कोशिश करते हुए जहन्नम की आग से पनाह मांगने की दुआ करें। वहीं इस अशरे में हर इबादत के बाद जहन्नम की आग से छुटकारे के लिये दुआ करें, इंशाअल्लाह तब जाकर हम रोज़...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.