नई दिल्ली, अक्टूबर 1 -- कुछ कहानियां सिर्फ पढ़ी नहीं जातीं, दिल में उतर जाती हैं। ऐसी ही कहानी है इन भारतीयों की, जिन्होंने मौत को बिल्कुल सामने देखा, लेकिन अपनी जान बचाने से पहले किसी और की जिंदगी बचाने का फैसला किया। करीब चार दशक पहले आसमान में नीरजा भनोट ने ऐसा ही साहस दिखाया था। आज एक बार फिर उसी जज्बे की याद दिला रहे हैं भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार। कॉकपिट में चाकू से हमला हुआ, विमान तेजी से नीचे गिरने लगा और करीब 180 लोगों की जिंदगी कुछ ही पलों में खतरे में पड़ गई। खून से लथपथ होने के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार ने हार नहीं मानी। उन्होंने हमलावर का सामना किया, कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की और इस तरह यात्रियों तथा क्रू को अंदर पहुंचने का मौका मिला। इसके बाद यात्रियों और विमान में मौजूद दूसरे पायलटों ने हमलावर को काब...