नई दिल्ली, मई 7 -- सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार (7 मई) को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर लोग धार्मिक प्रथाओं या धर्म से जुड़े मामलों पर संवैधानिक अदालत में सवाल उठाने लगेंगे तो विभिन्न रीति-रिवाजों और परंपराओं पर सवाल उठाने वाली सैकड़ों याचिकाएं दायर होंगी जिससे धर्मों और सभ्यता के विघटन का खतरा पैदा हो जाएगा। इसलिए, ऐसे मामलों से निपटते समय अदालतों को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच, जिसमें जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल हैं, ने कहा कि अगर अदालत किसी एक ऐसे मामले में दखल देती है, तो इससे धर्म से जुड़े ऐस...