प्रयागराज, अक्टूबर 30 -- अपनी पसंद के स्थान पर तबादला कराने के बाद आदेश से मुकरने वाले रेलकर्मियों को अब इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। रेलवे बोर्ड ने ऐसे कर्मचारियों के लिए सख्त प्रावधान लागू किया है। इसके तहत सर्विस बेस्ड रिक्वेस्ट ट्रांसफर (एसबीआरटी) योजना के तहत तबादला आदेश जारी होने के बाद असहमति जताने वाले कर्मचारी भविष्य में इस योजना के तहत दोबारा आवेदन नहीं कर सकेंगे। साथ ही सामान्य प्रक्रिया से अंतर रेलवे और अंतर मंडल तबादले के लिए भी एक साल तक आवेदन नहीं कर पाएंगे। रेलवे बोर्ड ने 29 अक्तूबर को इस संबंध में नया आदेश जारी किया है। यह नियम 20 साल से अधिक नियमित सेवा पूरी कर चुके अराजपत्रित रेलकर्मियों के अपनी इच्छा से तबादले के आवेदनों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था के क्रम में जारी किया गया है। यह भी पढ़ें- स्वेच्छा से लेसिक सर्जरी करान...