प्रयागराज, जून 20 -- एनसीजेडसीसी के बहुउद्देशीय सभागार में शनिवार को विमर्श संवाद आयोजित किया गया। केंद्र के उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय और रंगकर्मी सुषमा शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वरिष्ठ रंगकर्मी प्रो. असीम मुखर्जी ने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के बावजूद रंगमंच की प्रासंगिकता कभी समाप्त नहीं होगी। क्योंकि कलाकार और दर्शक के बीच प्रत्यक्ष संवाद की शक्ति किसी अन्य माध्यम में संभव नहीं है। बंगाल में नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, समाज और जनजीवन का अभिन्न हिस्सा है। कोलकाता में आज भी 25 से अधिक सक्रिय रंगमंच हैं, जहां प्रतिदिन नाट्य प्रस्तुतियां होती हैं। दर्शकों का उत्साह कलाकारों के समान ही दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि बंगाल के रंगमंच की जड़ें दादा-दादी की...