देहरादून, अक्टूबर 7 -- देहरादून, वरिष्ठ संवाददाता। उत्तराखंड के पारंपरिक ढोल वादन की संगीतात्मक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं पर बुधवार को दून लाइब्रेरी एवं शोध केंद्र में संगोष्ठी में व्यापक चर्चा की गई। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की टैगोर नेशनल फेलोशिप/स्कॉलर शोध परियोजना के तहत हुई इस संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञों ने ढोल को सिर्फ लोकवाद्य नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सामाजिक संरचना, अनुष्ठानों और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा बताया।

उत्तराखंड का ढोल : संगीत, रीति-रिवाज और समुदाय उत्तराखंड का ढोल : संगीत, रीति-रिवाज और समुदाय पर संगीतशास्त्रीय दृष्टिकोण विषय पर हुए आयोजन में शोध-पत्रों के माध्यम से ढोल वादन की परंपरा और सामुदायिक जीवन में उसकी भूमिका पर चर्चा की गई। साथ ही पारंपरिक ढोल-दमाऊ की जीवंत प्रस्तुति और व्याख्यान-...