नई दिल्ली, जुलाई 7 -- गांव में पहले बैंक का काम आसान नहीं था। पैसे निकालने हों, खाते की जानकारी लेनी हो, पेंशन देखनी हो या किसी सरकारी योजना की राशि आई या नहीं, इसके लिए कई लोगों को बैंक शाखा तक जाना पड़ता था। रास्ता दूर हो, तो पूरा दिन निकल जाता था। बीसी सखी योजना ने इसी परेशानी को गांव के स्तर पर हल करने की कोशिश की। अब गांव की ही महिला बैंकिंग सर्विस लेकर लोगों के दरवाजे तक पहुंचती है। वह पैसा निकालने, जमा करने, बैलेंस देखने, आधार आधारित पेमेंट, डिजिटल ट्रांजैक्शन और कई बेसिक बैंकिंग कामों में मदद करती है। यह बदलाव केवल बैंकिंग का नहीं है, बल्कि महिलाओं की भूमिका बदलने की कहानी है। जो महिला पहले अपने घर और समूह तक सीमित मानी जाती थी, वही अब गांव में फाइनेंशियल गाइड, डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर और भरोसे की नई पहचान बन रही है।घर से बाहर, जिम...