वाराणसी, जनवरी 15 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। डॉ.राजेंद्र उपाध्याय मर्मज्ञ नाट्यधर्मी तो थे ही विशुद्ध फक्कड़ बनारसी भी थे। उन्हें देखकर उनके गुणों का अंदाजा लगाना किसी के लिए भी मुश्किल था। वह रोज गंगा स्नान करते थे। उन्हें खस का साबुन लगाने का बहुत शौक था। वह जब साबुन लगाते तो थोड़ी दूर तक उसकी खुशबू जाती। हम लोग समझ जाते कि डॉ.साहब आ गए हैं। तब हम लोग आपस में बतियाते हुए कहते चलो चला जाए उस घाट पर खस का साबुन हमलोग भी लगाते हैं। यह संस्मरण है डॉ.राजेंद्र उपाध्याय के बाल सखा वरिष्ठ रंगधर्मी एवं क्लासिकल फोटोग्राफर नारायण द्रविड़ का। उन्होंने बताया कि राजेंद्र उपाध्याय बीएचयू में प्रवेश लेने से पहले तक मराठी स्टाइल में धोती और कुर्ता पहना करते थे। बीएचयू में प्रवेश के बाद उन्होंने पैंट-शर्ट पहननी शुरू की। उन्होंने कुछ भी पहना, कपड़े का ...