नई दिल्ली, जुलाई 13 -- आजकल ज्यादातर माता-पिता वर्किंग होते हैं और ऐसे में बच्चे की देखभाल का जिम्मा नैनी या फिर स्कूल के डेकेयर पर आ जाता है। पहले लोग ज्वाइंट फैमिली में रहा करते थे, तो चाचा-चाची, दादा-दादी मिलकर बच्चों को पाल लिया करते थे लेकिन अब न्यूक्लियर फैमिली में लोग रहते हैं और ऐसे में बच्चों को संभालना सबसे बड़ी चुनौती बन जाते हैं। बड़े शहरों में खासतौर पर बच्चों को डेकेयर में भेजना सबसे सही ऑप्शन माना जाने लगा है। पेरेंट्स वर्किंग होते हैं और पड़ोसियों पर विश्वास नहीं कर सकते, ऐसे में स्कूल में सुबह से शाम तक बच्चे को भेजकर माता-पिता निश्चिंत हो जाते हैं। लेकिन कुछ जगहों पर बच्चे का डेकेयर में रहना भी सुरक्षित नहीं रहा। हाल ही में बेंगलुरु की एक घटना सामने आई है, जिसमें केयरटेकर्स ने बच्चों को चुप कराने के लिए बाथरूम में बंद कि...