नई दिल्ली, जनवरी 27 -- आपने अकसर लोगों को कहते हुए सुना होगा कि एक बच्चे के जन्म के साथ मां का भी दूसरा जन्म होता है। लेकिन कई बार बच्चे के पैदा होते ही मां की देखभाल और इलाज में लापरवाही होने लगती है। पूरा ध्यान सिर्फ नवजात की देखभाल पर केंद्रित होकर रह जाता है। मां से उम्मीद की जाती है कि वह अपने आप ठीक हो जाएगी। लेकिन सच यह है कि डिलीवरी के बाद का समय महिला की जिंदगी का सबसे नाजुक दौर होता है। हम भूल जाते हैं कि प्रसव के बाद का समय (Postpartum) केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि उस स्त्री के शरीर और मन के लिए भी पुनर्निर्माण का दौर होता है। वह कोई जादू की छड़ी नहीं है जो रातों-रात ठीक हो जाएगी; वह एक घाव है जिसे भरने के लिए वक्त, पोषण और अपार संवेदनशीलता की जरूरत होती है। सीके बिरला अस्पताल की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति रहेजा कहती हैं...
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