अलीगढ़, अप्रैल 2 -- (ग्राउंड रिपोर्ट) हाईलाइटर ....'अ....अ....अंकल.... न....नमस्ते।' 14 साल का आर्यन पहले ऐसे नहीं बोलता था। कभी आत्मविश्वास से भरा रहने वाला यह बच्चा अब शब्दों में अटकने लगा है। पिछले दो-तीन वर्षों से उसकी दिनचर्या स्मार्टफोन, ऑनलाइन क्लास और गेमिंग तक सिमट गई। धीरे-धीरे उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा, कम बोलना, अकेले में खुद से बातें करना और रात में बड़बड़ाना। परिवार ने काउंसलिंग शुरू कराई। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम ने उसके मानसिक संतुलन और संप्रेषण क्षमता पर असर डाला है। आर्यन अकेला नहीं है, डिजिटल दबाव के चलते ऐसे कई बच्चे बदलाव की गिरफ्त में हैं।अलीगढ़, लोकेश शर्मा। डिजिटल दुनिया ने बच्चों की पढ़ाई और मनोरंजन को आसान बनाया है, लेकिन इसका दूसरा पहलू अब चिंता बढ़ा रहा है। भारतीय शिशु रोग अकादमी (आईएपी) ...