वाराणसी, फरवरी 13 -- वाराणसी, हिटी। अपनी खास शैली, अंदाज और परिधान के लिए चर्चित रहे 'काशी का अस्सी' के प्रमुख किरदार डॉ. रामजी राय को याद करते हुए प्रख्यात उपन्यासकार प्रो. काशीनाथ सिंह गुरुवार को भावुक हो गए। डॉ. राय का पिछले दिनों गाजीपुर में निधन हो गया था। प्रो. सिंह ने बताया कि अस्सी पर रामजी को महीनों देखने के बाद तय किया कि 'देख तमाशा लकड़ी का' लिखा जाना चाहिए। कहा- दरअसल रामजी के बिना अस्सी मेरे लिए सूनी हो गई। फिल्मकार चंद्रप्रकाश द्विवेदी रामजी पर अलग से फिल्म बनाना चाहते थे, पर फिल्म बनी नहीं। प्रो. सिंह के शब्दों में... 'जब तक काशी का अस्सी किताब है, राम जी रहेंगे और उनके साथ मैं भी रहूंगा।' उन्होंने बताया कि साल 1970 में रामजी एमए में मेरे विद्यार्थी रूप में बीएचयू में मिले। अस्सी पर एक दिन बाटी-चोखा खिलाया। अस्सी पर मिलते ज...