जमशेदपुर, फरवरी 25 -- सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के आदेशानुसार साकची स्थित सबल सेंटर में जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से शहरी महिलाओं के बीच डायन प्रथा जागरूकता अभियान चलाया गया। डॉ. साहिर पाल ने कहा कि डायन प्रथा एक सामाजिक कलंक और गंभीर कुरीति है, जो हिंसा के रूप में सामने आती है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच और शिक्षा का अभाव, साथ ही जागरूकता अभियानों का सीमित प्रभाव इस प्रथा को रोकने में बाधक हैं। झारखंड ने साल 2001 में कड़े कानून बनाकर इस कुरीति के खिलाफ कदम उठाए हैं। डॉ. राजीव लोचन महतो, जिला कुष्ठ परामर्शी ने बताया कि प्राचीन मान्यता के अनुसार डायनें अलौकिक शक्तियों से नुकसान पहुंचाती हैं। संपत्ति विवाद, पारिवारिक झगड़े या व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते भी महिलाओं, विशेषकर विधवाओं और अकेली महिलाओं को निशा...