वाराणसी, जून 27 -- वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। डबडबाई आंखें। जुबां पर 'या हुसैन' की सदा। दिलों में कर्बला के शहीदों का गम। यजीद के जुल्म-ओ-सितम की कहानी कहते ताजिये। मुस्लिम समाज का हर शख्स ग़मजदा।। मोहर्रम की दसवीं तारीख यौमे-आशूरा पर शुक्रवार को पूरा शहर का यही माहौल था। शहर की लगभग हर सड़क पर उमड़े हजारों अकीदतमंदों के रंज-ओ-गम का ऐसा ही अंदाज दिखा। विभिन्न इलाकों से निकले 500 से अधिक ताजियों के जुलूस देर शाम तक दरगाह-ए-फातमान, सरैयां, तेलियानाला, शिवाला घाट और अन्य कर्बला स्थलों पर पहुंचे, जहां उन्हें ठंडे किए गए। यह भी पढ़ें- हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में जुलूस निकालकर मातम मनायाजुलूस के दौरान माहौल जुलूस के दौरान फिजाएं नारा-ए-तकबीर 'अल्लाह-हू-अकबर' और 'या हुसैन' से गूंजती रहीं। विभिन्न अंजुमनों के मातमदारों ने सीनाजनी की, ज...