हिन्दुस्तान, मार्च 11 -- निवेश के नाम पर रेलवे से सेवानिवृत्त हुए बुजुर्ग से लाखों रुपये ठगने वाले के खिलाफ 10 साल से संभालकर रखी गई डाकघर की रसीदें अहम सबूत साबित हुईं। तीस हजारी अदालत ने 23.50 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में आरोपी जसपाल सिंह को दोषी करार दिया है। यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी की दास्तान है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पुख्ता दस्तावेजी सबूतों के सामने आरोपी की खोखली दलीलें टिक नहीं पाती हैं।सेवानिवृत्त होने पर अच्छी रकम मिली थी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुरभि सेठी की अदालत कुलतार सिंह की शिकायत पर मामले की सुनवाई कर रही थीं। शिकायतकर्ता कुलतार ने बताया कि भारतीय रेलवे से गार्ड के पद से 31 अगस्त 2015 को सेवानिवृत्त होने पर उन्हें अच्छी रकम मिली थी। कुलतार ने आरोप लगाया कि उनके बेटे के दोस्त जसपाल सिंह ने उन्हें अप...