पाकुड़, दिसम्बर 26 -- पाकुड़। पाकुड़ में पड़ रही हाड़ कंपकपाने ठंड से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। जिले के प्रखंड क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों और विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब, मजदूर, असहाय और निर्धन लोग शीतलहरी की मार झेलने को मजबूर हैं। लगातार बढ़ती ठंड के कारण लोग रात गुजारने के लिए खजूर के पत्तों की चटाई और निवाड़ी का बिछावन लगाकर सोने को विवश हैं। कड़ाके की ठंड में कई लोगों के मन में यह डर बना हुआ है कि कहीं ठंड के कारण उनकी जान न चली जाए। ऐसे हालात में परिवार और छोटे बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता गहराती जा रही है। ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में अब तक कंबल वितरण नहीं होने से लोगों में गहरी निराशा है। वर्तमान स्थिति प्रसिद्ध लेखक प्रेमचंद की कहानी 'पूस की रात' की याद दिलाती है। जिसमें ठंड में गरीबों की पीड़ा और संघर...
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