नई दिल्ली, मार्च 29 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2015 में ट्रेन से गिरकर हुए हादसे के बाद दोनों हाथ कटने का दावा करते हुए मुआवजे के लिए एक यात्री की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि घटना से जुड़े तथ्यों में गंभीर विरोधाभास है और मामले में वास्तविक यात्रा तक संदेह के घेरे में है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड और याचिकाकर्ता के बयान में घटना के स्थान को लेकर बड़ा अंतर है। याचिकाकर्ता के अनुसार, वह मार्च 2015 में सोनीपत से मालवा एक्सप्रेस में सवार होकर झांसी जा रहा था। उसने दावा किया कि भीड़ के कारण वह सोनीपत और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेन से गिर गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और बाद में उसके दोनों हाथ काटने पड़े। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने घटनास्थल सदर बाजा...
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