नई दिल्ली, मार्च 24 -- ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 'शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना' का गठन कर दिया है। यह सेना सनातन धर्म की मान्यताओं के विरुद्ध कार्य करने वालों पर अंकुश लगाने और गौरक्षा के संकल्प को सिद्ध करने के लिए एक संगठित सैन्य शक्ति के रूप में कार्य करेगी। इसके संचालन के लिए 'शंकराचार्य चतुरंगिणी सभा' का औपचारिक गठन भी कर लिया गया है। शस्त्र के रूप में फरसा हाथों मे होगा। काशी के शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में शंकराचार्य ने इस सेना के बारे में विस्तार से बताया। अगले माघ में अमावस्या के दिन शंकराचार्य चतुरंगिणी के एक अक्षौहिणी सैनिक के साथ संगम स्नान करेंगे । उसके बाद सेना कार्य शुरू करेगी।कार्यप्रणाली: टोको, रोको और फिर ठोको शंकराचार्य ने इस सेना की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करते हुए ...