जमशेदपुर, अप्रैल 4 -- सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्य किए जाने के फैसले ने देशव्यापी विरोध की लहर पैदा कर दी है। इस आदेश के विरोध में शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के लाखों शिक्षक 'टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' के बैनर तले एकजुट हुए हैं। केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रदर्शन का सीधा असर झारखंड और विशेष रूप से जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) के शैक्षणिक ढांचे पर पड़ता दिख रहा है। झारखंड में इस फैसले का प्रभाव काफी व्यापक है। शिक्षक संघों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राज्य में लगभग 25,000 ऐसे शिक्षक हैं जिनकी सेवा शर्तों पर इस आदेश के बाद तलवार लटक गई है। झारखंड में 2011 से पहले बड़ी संख्या में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में ...