जमशेदपुर, जनवरी 8 -- आदिवासी बहुल इलाकों में टुसू पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सकरात यानी मकर पर्व पर घर-घर जील पीठा और गुड़ पीठा बनाया जाएगा। 14 जनवरी को जील पीठा यानी मांस का पीठा तैयार किया जाएगा, जबकि 15 जनवरी को गुड़ पीठा बनाया जाएगा। इसके बाद करीब एक महीने तक नदी घाटों पर टुसू मेले का आयोजन होगा। टुसू पर्व पर संताल आदिवासी समाज में वेश बदलकर नृत्य करने की अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इस परंपरा के तहत युवक साड़ी पहनकर महिलाओं के वेश में सजते हैं और बूढ़ी गाड़ी आसेन नामक पारंपरिक नृत्य करते हुए गांव-गांव घूमते हैं। मकर संक्रांति के दूसरे दिन से यह सिलसिला शुरू होता है, जो करीब पखवाड़े भर तक चलता है। परंपरा के अनुसार, गांव के सभी युवक टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और नृत्य प्रस्तुत करते हैं। इसके बदले घरों से उन्हें मूढ़ी, चावल, गुड़ प...