किशनगंज, जुलाई 12 -- किशनगंज। निज संवाददाता टीबी का नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के मन में एक ऐसी बीमारी की तस्वीर उभरती है, जिसका इलाज लंबा होता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि टीबी की असली चुनौती केवल संक्रमण नहीं, बल्कि मरीजों द्वारा इलाज बीच में छोड़ देना, लक्षणों को नजरअंदाज करना और समय पर स्वास्थ्य संस्थान तक नहीं पहुंचना है। यही कारण है कि साधारण टीबी कई बार मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी का रूप ले लेती है। ऐसी स्थिति में उपचार अधिक लंबा, जटिल और मरीज के साथ-साथ पूरे परिवार के लिए शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से कठिन हो जाता है। किशनगंज जिले के रहने वाले मोहम्मद आरिफ (परिवर्तित नाम) की कहानी इसी सच को सामने लाती है। यह केवल बीमारी से उबरने की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि टीबी से लड़ाई दवा से पहले जागरूकता और अनुश...