लखनऊ, अप्रैल 2 -- टारगेटेड एनेस्थीसिया तकनीक दिल, फेफड़ा व गुर्दा प्रत्यारोपण वाले रोगियों में अधिक सुरक्षित और कारगार है। इसमें रोगी के पूरे शरीर के बजाय केवल उस प्रभावित हिस्से को सुन्न किया जाता है जिसका ऑपरेशन करना होता है। ऑपरेशन के दौरान मरीज बात करता रहता है। जरूरत पड़ने पर बेहोशी दी जा सकती है। इस तकनीक को सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया कहते हैं। ये जानकारी पीजीआई के एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ.संदीप खूबा ने दी। डॉ.संदीप ने बताया कि पीजीआई सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थेसिया तकनीक स्थापित करने वाला देश का चौथा संस्थान है। इस तनकीक से 100 ऑपरेशन किये जा चुके हैं। डॉ. सुजीत गौतम ने बताया कि इस विधि में रोगी को बेहोशी की कम दवाएं देनी होती हैं। रोगी को वेंटिलेटर की जरूरत कम पड़ती है। मरीज जल्दी ठीक होता है। ये तनकीक पहले से दिल व फेफड़ों की बीमार...