जमशेदपुर, अप्रैल 23 -- देव कृष्ण सुमन का सफर पक्के इरादे, हिम्मत और पक्के इरादे की एक दिलचस्प कहानी है, जो न सिर्फ अपनी कामयाबी, बल्कि स्किल-बेस्ड एजुकेशन की बदलाव लाने वाली ताकत को भी दिखाता है।झारखंड के रांची जिले के बुंडू प्रखंड के गोसाईडीह गांव के रहने वाले, 23 साल के देव कृष्ण सुमन एक आम निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में इकलौते बेटे के तौर पर बड़े हुए। उनके पिता, बुद्धेश्वर गोराई, खेती-बाड़ी संभालने के साथ-साथ एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थे जबकि उनकी मां, शोभा देवी सिलाई का काम करके घर का खर्च चलाती थीं। पैसे की तंगी के बावजूद, परिवार पढ़ाई के प्रति पूरी तरह से समर्पित रहा। यह भी पढ़ें- दृढ़ निश्चय एवं तकनीकि शिक्षा ने दिलायी सफलता उनके पिता, जो बुंडू के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में भी पढ़ाते थे, जहां से देव ने भी पढ़ाई की थी, लंबे समय तक...
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