टाइगर, डॉल्फिन और घड़ियाल के बावजूद खाली क्यों रहा कतर्नियाघाट ?
लखनऊ, जून 22 -- एम रशीद/ मोतीपुर बहराइच। बाघ की दहाड़,गेरुआ नदी में अठखेलियां करती गंगा डॉल्फिन और सैकड़ों दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट- कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग प्रकृति का अनमोल खजाना है। लेकिन यह खजाना इन दिनों एक गहरे पर्यटन संकट की चपेट में है। शुल्क घटाया गया, व्यवस्था सुधारने के दावे हुए, फिर भी सैलानी नहीं आए। अब 30 जून से यह पूरा क्षेत्र नवंबर तक पर्यटकों के लिए बंद हो जाएगा। शुल्क बढ़ा तो पर्यटकों ने मुंह फेरा
पर्यटन शुल्क में वृद्धि वर्ष 2024-25 में वन विभाग ने राजस्व बढ़ाने के इरादे से पर्यटन शुल्क में भारी वृद्धि की। लेकिन नतीजा उल्टा रहा और पर्यटकों की संख्या में तेज गिरावट आई। इसके बाद विभाग ने 2025-26 में दरों में बड़ी कटौती की। थारू हट 5700 से घटाकर 3600 रुपये, जंगल सफारी 4700 से 3600 रुपये, बोटिंग 5100 से सीधे 2400 रुपये...
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