राज कुमार, जून 10 -- झारखंड हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए कई सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने अधिकारियों को रेप की घटनाओं पर तुरंत जीरो एफआई दर्ज करने और दो महीने में जांच पूरी करने को कहा है। अदालत ने विवादित टू-फिंगर टेस्ट पर पूरी तरह रोक लगाते हुए पीड़िता के बच्चों के लिए 12वीं तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान करने को भी कहा है। अदालतों ने वन-स्टॉप सेंटरों की स्थिति सुधारने, 30 दिनों में मुआवजा देने और पीड़ितों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने की कड़ी हिदायत भी दी है। झारखंड हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस एमएस सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच ने सोमवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए उक्त निर्देश जारी किए। अदालत ने उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई का...