रांची, मार्च 22 -- राजू प्रसाद रांची। पर्यावरण के सभी घटक एक-दूसरे पर परस्पर निर्भर हैं। इनमें से किसी भी एक इकाई में आने वाला बदलाव न केवल स्थानीय, बल्कि दूरगामी और क्षेत्रीय परिणाम लेकर आता है। पृथ्वी के वायुमंडल और जलमंडल के बीच का सटीक संतुलन ही जीवमंडल का पोषण करता है, और इसी अनूठे अंतर्संबंध के कारण सौरमंडल में पृथ्वी एकमात्र जैविक ग्रह है। हालांकि, झारखंड के संदर्भ में यह संतुलन अब डगमगाता नजर आ रहा है।पठारी क्षेत्रों में बन रही बीहड़ जैसी स्थितिझारखंड के पठारी क्षेत्रों में वनों की अंधाधुंध कटाई से मिट्टी की ऊपरी परत का कटाव तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही, तो यहां भी चंबल जैसे बीहड़ बन सकते हैं। प्राकृतिक अपक्षय के कारण चट्टानों के ऊपर जमी मिट्टी की परत नष्ट हो रही है, जो नदियों के अस्तित्व के लिए ब...
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