रांची, जुलाई 2 -- झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के उन पारा शिक्षकों को बड़ी राहत दी है, जो बाद में नियमित इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक बने और सेवानिवृत्त हुए। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमित नियुक्ति से पहले पारा शिक्षक के रूप में दी गई संविदा सेवा अवधि भी पेंशन की गणना में जोड़ी जाएगी। जब सरकार ने नियमित नियुक्ति के लिए पारा शिक्षक के अनुभव को पात्रता का आधार बनाया था, तब उसी सेवा को पेंशन के समय नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इसे लेकर धनबाद, गिरिडीह, रामगढ़ और पाकुड़ के पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है। प्रार्थियों का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता मनोज टंडन और सिद्धार्थ रंजन ने अदालत को बताया कि प्रार्थी पहले आठ...