रांची, अप्रैल 9 -- झारखंड सरकार की स्थानीय नीति में कथित विसंगतियों को दूर करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका में हस्तक्षेप करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने बुधवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह राज्य सरकार का नीतिगत निर्णय है और इस विषय में न्यायालय कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि नीति में किसी प्रकार का संशोधन या सुधार करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। प्रार्थी झारखंड विस्थापित संघर्ष मोर्चा के अधिवक्ता अभिषेक कुमार ने दलील दी कि राज्य सरकार जिन लोगों की जमीन विकास कार्यों के लिए अधिग्रहित करती है, उन्हें स्थानीय नीति में समुचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि विस्थापित लोग अपना घर-बार छोड़कर विकास कार्यों के लिए जमीन देते हैं, लेकिन बाद म...