मधुबनी, जनवरी 28 -- झंझारपुर। मिथिलांचल और सीमांचल की लाइफलाइन माने जाने वाले झंझारपुर-निर्मली रेलखंड पर सफर को रफ्तार देने की कवायद कछुआ गति की भेंट चढ़ती दिख रही है। आमान परिवर्तन के सालों बाद भी इस रेलखंड पर बुनियादी ढांचे का अभाव यात्रियों की सुरक्षा और समय पर भारी पड़ रहा है। ताजा मामला झंझारपुर जंक्शन और मिथिला दीप हॉल्ट के बीच स्थित ब्रिज संख्या 97ए का है, जो बनकर तैयार तो है, लेकिन तकनीकी तालमेल की कमी के कारण फिलहाल एक 'डेड एसेट' बनकर रह गया है। तैयार ढांचा, फिर भी पुरानी पटरी का सहारा: इस नए ब्रिज की भौतिक संरचना का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। इस ब्रिज का निर्माण कार्य पांच वर्ष पूर्व ही शुरू किया गया था। विडंबना यह है कि आधुनिक तकनीक से बना यह पुल परिचालन के लिए अब तक तरस रहा है। वर्तमान में ट्रेनों का परिचालन पुराने ब्रिजों पर...