लखनऊ, अगस्त 11 -- -इन मरीजों में स्लीप एपनिया का खतरा 4.7 गुना अधिक -लोहिया संस्थान और दिल्ली एम्स के शोधकर्ताओं का अध्ययन -ग्रेड-2 फैटी लिवर के 81.3% मरीजों में मिला स्लीप एपनिया -अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'स्लीप एंड विजिलेंस' में शोध प्रकाशित लखनऊ। सुशील सिंह फैटी लिवर को हल्के में न लें। इसका असर सिर्फ लिवर तक सीमित नहीं हो सकता। बल्कि नींद की बीमारी स्लीप एपनिया हो सकता है। इनमें भी खर्राटे, नींद में सांस रुकना, बार-बार नींद खुलना जैसे लक्षण हो सकते हैं। एक अध्ययन में फैटी लिवर और नींद में सांस रुकने के बीच मजबूत संबंध मिला है। यह शोध लोहिया संस्थान और एम्स दिल्ली के शोधकर्ताओं ने 102 फैटी लिवर मरीजों पर किया है। इसमें से 54 मरीजों में स्लीप एपनिया मिला। इनमें रात को नींद में बार-बार सांस रुकने की समस्या पायी गई। यानी हर दो में से करीब एक म...