ज्ञान ही मुक्ति का मार्ग, ऋतं वदिष्यामि ने वेदों का संदेश पहुंचाया
लखनऊ, जुलाई 27 -- वेदों के ज्ञान, नाट्य परंपरा और भारतीय संस्कृति की महत्ता को मंच पर जीवंत करते हुए नाटक 'ऋतं वदिष्यामि का मंचन रविवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी के राज बिसारिया प्रेक्षागृह में हुआ। प्रस्तुति का मूल संदेश था कि ऋते ज्ञानान् मुक्तिः, यानी ज्ञान के बिना मुक्ति संभव नहीं है। कार्यक्रम की शुरुआत गायिका सुचरिता गुप्ता के सामवेद स्वरगान से हुई, जिसने दर्शकों को आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ दिया। श्री नागरी नाटक मंडली न्यास, वाराणसी की प्रस्तुति का शुभारंभ नृत्य से हुआ। इसके बाद वेदों की अवधारणा और चारों वेदों की चुनिंदा ऋचाओं का सस्वर पाठ प्रस्तुत किया गया। नाटक में दर्शाया गया कि सृष्टि के संचालन से थके इंद्र ब्रह्मा से ऐसा माध्यम देने का आग्रह करते हैं, जिससे देवताओं को आनंद और ऊर्जा मिल सके। इस पर ब्रह्मा पंचम वेद के रूप में ना...
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