औरैया, मार्च 6 -- अछल्दा, संवाददाता। विकासखंड क्षेत्र के गांव चिमकुनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक आचार्य अभिषेक द्विवेदी महाराज ने भगवान के विराट स्वरूप सहित कई प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान और वैराग्य से बढ़कर भक्ति है। आचार्य ने बताया कि श्रीमद्भागवत वेदरूपी वृक्ष के पके हुए फल के समान है, जिसका मीठा होना निश्चित है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के द्वितीय स्कंध में वर्णित चार श्लोकों में संपूर्ण भागवत का सार समाहित है। इसके माध्यम से भगवान ने ब्रह्मा को सृष्टि का ज्ञान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि सृष्टि से पहले, सृष्टि के समय और सृष्टि के बाद भी केवल भगवान ही परम सत्य हैं। जो कुछ उनसे अलग दिखाई देता है वह माया है। विराट स्वरूप के माध्यम से बताया गया कि पूरा ब्रह्मांड ईश्वर के स्वरूप का विस्तार है। क...