विकासनगर, जनवरी 12 -- जौनसार बावर में माघ मरोज पर्व के तहत इन दिनों हर गांव का पंचायती आंगन लोक संस्कृति से गुलजार दिखाई दे रहा है। गांवों में पारंपरिक लोक गीतों की सुर लहरियां गूंज रही हैं। गांवों में जौनसारी वेशभूषा में हारूल, झेंता, रासो, तांदी गीतों और नृत्य का दौर चल रहा है। त्योहार के मौके पर विशेष व्यंजन परोसे जा रहे हैं। पंचायती आंगन में लोकगीतों, ढोल दमौं और रणसिंघे की गूंज सुनाई दे रही है। सोमवार को महिलाओं ने 'एबे आई सितलूवा डांडे री बारीत..., लागो तोंसो दो तरो नेगी रणिया भकाणो..., आमे लागे नशी बीबी बाना रूमाईला..., कागूणिया को मीना साथेणी... जैसे गीतों से समां बांध दिया। भोजन के बाद रात में चले गायन में बेणीरे घरोदा बेटूका हवा..., ठेको गोठो जगदेव के बूढोडे माये..., ओरूके बेणी सूबडा शिलाई के बूरा..., शीशमोंरे खंजरे मोडे फाकटोदा...