प्रयागराज, जनवरी 31 -- प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। कभी सोने-चांदी की चमक से पहचान बनाने वाला शहर का मीरगंज सराफा बाजार आज खामोशी और बेकारी की मार झेल रहा है। गहनों को निखारने वाले हुनरमंद हाथ अब परिवार चलाने के लिए ई-रिक्शा के हैंडल और संगम की नावों की पतवार थामने को मजबूर हैं। सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतों ने सराफा कारोबार की कमर तोड़ दी है। नतीजा यह कि बीते एक साल में यहां काम घटकर महज 25 फीसदी रह गया है। मीरगंज में करीब 1500 छोटी-बड़ी सराफा दुकानें हैं। कभी यहां 1100 से अधिक कारीगर नियमित काम करते थे। इनमें पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कारीगर बड़ी संख्या में शामिल थे। आज हालात यह हैं कि दर्जनों कारीगर या तो बेरोजगार हो चुके हैं या मजबूरी में पेशा बदल चुके हैं। कई कारीगर शहर छोड़कर गांव लौट गए हैं, जहां खेती ही उनका सह...
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