मेरठ, मार्च 12 -- कभी-कभी लगता है कि लचीलेपन की वजह से हमने बहुत गलती की है। अत्यधिक सहनशीलता भी हमारे अस्तित्व को मुश्किल में डाल रही है। हम पहले कहां से कहां तक थे। पाकिस्तान गया। अफ़गानिस्तान गया। बांग्लादेश चला गया। सनातन परंपरा में खलल डालने वालों का मुखर होकर विरोध करें। कहीं ऐसा ना हो कि फिर बहुत देर हो जाए। परिवार आपका है, बच्चे आपके हैं, स्वास्थ्य आपका है। खुद सोचें क्या करना है, क्या नहीं। मेरठ कॉलेज एवं उप्र संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में विधि विभाग के मूटकोर्ट में भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुई संगोष्ठी में पतंजलि विवि के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने उक्त बात कही। आचार्य ने कहा कि हम किसी एक क्षेत्र की बात नहीं करते बल्कि सभी क्षेत्रों की बात करते हैं। वह किसी और संस्कृति में नहीं है। समग्र सोच केवल भारतीय संस्कृति और भारती...
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