हेमलता कौशिक, जून 20 -- मकान के मालिकाना हक को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति पर दूसरे पक्ष की तुलना में कब्जे का अधिकार बेहतर तरीके से साबित कर देता है, तो वह उस संपत्ति का कब्जा वापस पाने का हकदार होगा। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने यह टिप्पणी एक संपत्ति विवाद की सुनवाई के दौरान की। पीठ ने लैटिन सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि कब्जा पूरी दुनिया के खिलाफ मान्य होता है, सिवाय उस व्यक्ति के जिसके पास बेहतर अधिकार हो। मामले में वादी ने दावा किया था कि उसने साल 2006 में मूल आवंटी से जीपीए, बिक्री समझौता, हलफनामा, रसीद, कब्जा पत्र व वसीयत के आधार पर संपत्ति खरीदी थी। बाद में उसने वर्ष 2009 में प्रतिवादी को 15 सौ रुपए मासिक किराए पर किरायेदार के रूप में रखा, लेकिन क...