गिरडीह, अप्रैल 25 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। जो तपता है वही चमकता है, और जो चमकता है वही जगत को प्रकाश देता है। सोना कितना भी कीमती क्यों न हो, जब तक वह अग्नि में नहीं तपता, तब तक कुंदन नहीं बनता। उसी प्रकार साधक जब तक साधना की अग्नि में नहीं तपता है, तब तक उसके भीतर की अशुद्धियां समाप्त नहीं होतीं। समर्पण से ही व्यक्तित्व निखरता है। उक्त बातें संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य गुणायतन प्रणेता मुनि प्रमाण सागर जी महाराज ने प्रवचन सभा में कही। मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि खदान से निकला सोना तेज अग्नि में अपने आपको समर्पित कर वास्तविक चमक प्राप्त करता है। यह भी पढ़ें- सत्संग से जागृत होती है बुरे कर्मों को त्यागने की प्रवृति: उसी प्रकार जब शिष्य गुरुचरणों में समर्पित होता है, तो गुरु उसकी आंतरिक अशुद्धियों को द...
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