गिरडीह, जून 14 -- बेंगाबाद, प्रतिनिधि। आजादी के 78 साल बाद और अलग झारखंड बने 25 साल से ज्यादा हो गए, लेकिन बेंगाबाद प्रखंड के ताराजोरी पंचायत अंतर्गत जोनराबेड़ा संथाल गांव में आज भी लोग नदी से प्यास बुझा रहे हैं। नल-जल योजना पाइप और टंकी तक सिमट कर रह गई। गांव में केवल एक चापाकल है, जिसके भरोसे 200 की आबादी नहीं चल सकती। नतीजा महिलाएं रोज सुबह-शाम आधा किलोमीटर पैदल चलकर नदी से पानी ढोती हैं। जोनराबेड़ा गांव में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां की महिलाएं दिन में दो बार सुबह और शाम नदी से पानी लाकर घरों में भंडारण करती हैं। उसी पानी से पीने से लेकर खाना बनाने और घरेलू कामकाज तक होता है। गांव की सुबीन किस्कू, चांदमुणि हेम्ब्रम, बहामुणि सोरेन और सुंदरी हांसदा ने बताया कि यह समस्या सिर्फ गर्मी की नहीं है। हर मौसम में पानी के लिए जूझना पड़त...