किशनगंज, अगस्त 10 -- किशनगंज। मातृ मृत्यु को रोकने की लड़ाई केवल प्रसव कक्ष में नहीं लड़ी जाती। इसकी शुरुआत गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ही हो जाती है जब रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, रक्त शर्करा, भ्रूण की स्थिति और अन्य जोखिमों की समय पर पहचान की जाती है। इसी बुनियादी सोच को स्वास्थ्य व्यवस्था के अंतिम छोड़ तक ले जाने में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की भूमिका महत्वपूर्ण है। अभियान का लक्ष्य महज गर्भवती महिलाओं की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी गर्भावस्थाओं की पहचान करना है, जिनमें मां या गर्भस्थ शिशु को अतिरिक्त खतरा हो सकता है। समय रहते जोखिम की पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह, आवश्यक जांच और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफरल ये सभी कदम मिलकर मातृ एवं शिशु मृत्यु को रोकने की एक सतत श्रृंखला बनाते हैं। जिले में भी अभियान...