अमरोहा, अगस्त 30 -- दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह स्थानीय जैन मंदिर अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन किया गया। जैन मुनि क्षुल्लकरत्न समर्पण सागर महाराज के सानिध्य में पूजा-अर्चना कराई गई। पंडित सचिन जैन शास्त्री ने कहा कि उत्तम मार्दव एक जैन अवधारणा है। कहा कि बड़े-बड़े संपत्तिशाली तीर्थंकर, चक्रवर्ती व स्वर्ग में कुबेर आदि की संपत्ति भी स्थिर नहीं रही। एक दिन पुण्य खत्म होते ही उनको छोड़कर जाना पड़ा। फिर क्षणिक संपत्ति के पीछे गर्व करूं तो मेरे समान अधर्मी या मूर्ख कौन होगा। इसी तरह जातिमाद, कुलमद, रूपमद, तपमद, पूजामद भी मद हैं। यह मद स्थिर रहने वाले नहीं हैं। ये संसार में आपस में विरोध पैदा कर क्रोध को बढ़ाने वाले व मान-अपमान आदि को उत्पन्न कर मानहानि के अलावा और कुछ नहीं हैं। ऐसे विचार कर ज्ञानी लोग कभी भी गर्व नहीं करते। जो नम्र...