शामली, मार्च 2 -- शहर की जैन धर्मशाला में आयोजित धार्मिक शिविर के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि प्रतीक सागर मुनिराज ने जैन धर्म में मंदिर, दर्शन और तीर्थों के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में मंदिर केवल एक भवन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और आत्मकल्याण का प्रतीक है। मुनिश्री ने बताया कि मंदिर को समोसरन का प्रतीक माना गया है, जहां तीर्थंकर भगवान सम्यक ज्ञान का उपदेश देते हैं। इसलिए जब भी कोई भक्त मंदिर में प्रवेश करे, उसे यह भाव रखना चाहिए कि वह समोसरन में उपस्थित होकर आत्मकल्याण का अवसर प्राप्त कर रहा है। उन्होंने भगवान के दर्शन की विधि बताते हुए कहा कि दर्शन करते समय पहले बिना पलक झपकाए भगवान के चरण कमल, फिर नाभि कमल, हृदय कमल, मुख कमल और अंत में संपूर्ण दिव्य स्वरूप का अवलोकन करना चाहिए। इसके प...