जैन धर्म के सिद्धांत ही विश्व कल्याण का आधार : विमर्श सागर
हापुड़, मई 22 -- शुक्रवार को जैन संत भवन में जैन लोक पर विराजमान भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्श सागर महाराज ससंघ के 33 मुनिराजों ने जैन भक्तों ने प्रवचन दिए हैं। जिसमें उन्होंने कहा कि मानव की अपनी भक्ति तथा गुरु का आशीर्वाद उसे मोक्ष मार्ग पर अग्रसर कर कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस दौरान मुनिराज विमर्श सागर ने कहा कि संत मिट्टी के घड़े के समान होते हैं, जो घड़े की भांति बजाकर शिष्य की परीक्षा लेते हैं। जिस प्रकार घड़ा जल को शीतलता प्रदान करता है, उसी प्रकार संत मानव के विकारों को दूर कर उसके जीवन में शीतलता, संतोष और शांति लाते हैं। यह भी पढ़ें- व्यक्ति जन्म से नहीं कर्मों से महान बनता है : भाव भूषण उन्होंने कहा कि नगर में संतों का आगमन, उनके आवास एवं आहार की व्यवस्था करना अत्यंत पुण्य का कार्य है। प्रत्येक जैन परिवार को...
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