शामली, अप्रैल 3 -- शामली। शहर की जैन धर्मशाला में आयोजित धार्मिक सभा में कैराना से पधारे मुनि श्री 108 विशद सागर महाराज ने प्रवचन करते हुए परोपकार को सबसे बड़ा धर्म बताया। शुक्रवार को मुनिराज ने कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता में निहित है। उन्होंने भगवान महावीर के सिद्धांत परस्परोपग्रहो जीवानाम का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी जीव एक-दूसरे के लिए सहायक हैं और यही सच्चे धर्म की आधारशिला है। प्रवचन के दौरान उन्होंने भोला राम नामक एक गरीब युवक की प्रेरणादायक कथा सुनाई। कथा के माध्यम से बताया कि किस प्रकार उसने अपनी समस्या को पीछे रखकर दूसरों की पीड़ा को प्राथमिकता दी। गुरु की कृपा से उसे मिले समाधानों से न केवल अन्य लोगों का जीवन सुधरा, बल्कि उसकी अपनी दरिद्रता भी समाप्त हो गई। मुनिराज ने क...