शामली, फरवरी 28 -- शहर की जैन धर्मशाला में शुक्रवार को पांच दिवसीय जैन दर्शन ज्ञान शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर का उद्घाटन करते हुए परम पूज्य क्रांतिवीर मुनि श्री 108 प्रतीक सागर मुनिराज ने कहा कि नमोकार मंत्र जैन दर्शन में मर्यादा को जीवन का आधार मानता है। मर्यादा के बिना जीवन दिशाहीन हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नदी अपने तटों की सीमा में सुंदर और उपयोगी लगती है, लेकिन मर्यादा तोड़ते ही विनाशकारी बन जाती है, उसी प्रकार मनुष्य भी अनुशासन और सिद्धांतों में बंधा रहे तो उसका जीवन मंगलमय होता है। मर्यादा के तीन प्रमुख आयाम बताते हुए उन्होंने धर्म की मर्यादा, कुल की मर्यादा और समाज की मर्यादा पर प्रकाश डाला। धर्म की मर्यादा में जैन आचरण जैसे पानी छानकर पीना, रात्रि भोजन का त्याग करना तथा आलू-प्याज जैसे कंदमूल से बचना शामिल है। समाज की ...