मुंगेर, सितम्बर 16 -- मुंगेर। जैन धर्मावलंबियों का दस दिवसीय पर्यूषण पर्व जिसे दशलक्षण धर्म के नाम से भी जाना जाता है बुधवार से शुरू हो रहा है। निर्मल जैन ने बताया कि, यह पर्व केवल पूजा, उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह वास्तव में अपने भीतर लौटने, आत्मचिंतन करने, जीवन को परिष्कृत करने और आत्मा को निर्मल बनाने का महापर्व है। दशलक्षण धर्म हमें आत्मा के उन दस शाश्वत गुणों का स्मरण कराता है, जिन्हें अपने जीवन में उतारकर हम स्वयं को बेहतर बना सकते हैं। उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम शौच, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम ब्रह्मचर्य और उत्तम आकिंचन्य धर्म का पालन किया जाता है। यह भी पढ़ें- दिगंबर जैन समाजके दशलक्षण पर्व आज से शुरू यह भी पढ़ें- दसलक्षण महापर्व: सद्कर्मों का वरण करेंगे श्रावक यह भ...