नई दिल्ली, नवम्बर 3 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण और 'बहुत दुखद' है कि 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जेलों के अंदर भेदभाव से जुड़े एक मामले में केंद्र द्वारा मांगी गई जानकारी अभी तक नहीं दी है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ मंगलवार को 'भारत की जेलों के अंदर भेदभाव' शीर्षक वाले एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने गौर किया कि केंद्र ने इस मामले में हुई प्रगति को दर्शाते हुए एक नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। कोर्ट ने बताया कि इस रिपोर्ट में 'मध्य प्रदेश पुलिस रेगुलेशंस, 1937' जैसे पुलिस नियमों और 'मॉडल प्रिज़न मैनुअल, 2016' के तहत गठित जिला-स्तरीय निरीक्षक बोर्ड से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है। यह भी पढ़ें- डीजीपी नियुक्ति संबंधी कानून के बारे में बताएं सभी राज्य ...