छपरा, अगस्त 14 -- मोबाइल की दुनिया से मातृभूमि की चौखट तक, जेन-जी ने दी जान सपने अपने थे, लेकिन जिंदगी देश के नाम कर गए सारण के लाल पेज चार की लीड इसी से छपरा, नगर प्रतिनिधि। जिस पीढ़ी को अक्सर मोबाइल की स्क्रीन, सोशल मीडिया की चमक, संगीत, वीडियो और आधुनिक जीवन के सपनों में डूबी पीढ़ी कहा जाता है, उसी पीढ़ी के कुछ युवाओं ने अपने सपनों की दिशा देशसेवा की ओर मोड़ दी। सारण की मिट्टी ने ऐसे कई जांबाजों को जन्म दिया, जिन्होंने सुख-सुविधाओं और निजी भविष्य की परवाह किए बिना भारतीय सेना की वर्दी पहनने का फैसला किया। उम्र छोटी थी, लेकिन हौसले बुलंद थे। किसी ने पढ़ाई के दिनों में ही सेना में जाने का संकल्प लिया तो किसी ने देश की सीमा पर आतंकियों से लोहा लेते हुए तिरंगे के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। रिविलगंज के संतोष कुमार सिंह से लेकर बनियाप...