नई दिल्ली, जून 11 -- वैदिक ज्योतिष में शनि को कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है। शनि की चाल सबसे धीमी मानी जाती है, इसलिए इनके छोटे से बदलाव का भी असर लंबे समय तक देखने को मिलता है। जुलाई 2026 में शनि देव की स्थिति में दो अहम परिवर्तन होने जा रहे हैं। पहला बदलाव 2 जुलाई को होगा, जब शनि रेवती नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 27 जुलाई से शनि वक्री हो जाएंगे। ज्योतिष में इन दोनों घटनाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है।पंचांग के अनुसार, 2 जुलाई 2026 को शनि देव रेवती नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश करेंगे। रेवती नक्षत्र का स्वामी बुध ग्रह है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस परिवर्तन का असर अलग-अलग राशियों पर अलग तरीके से पड़ सकता है। माना जा रहा है कि मेष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि के लोगों को इस दौरान कामकाज में थोड़ी अतिरिक्त ...