मेरठ, जून 4 -- जैन तीर्थ श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे श्री शांतिनाथ विधान में गुरुवार को सर्वप्रथम मुख्य वेदी पर विराजमान भगवान शांतिनाथ का अभिषेक किया गया। तत्पश्चात शांतिधारा कमलेश जैन, संभव जैन, विवेक जैन, आर्जव जैन आदि ने की। 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 15वें दिन आचार्य भाव भूषण महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि जहां पर अहिंसा तत्व की सर्वोपरि प्रधानता हो वहीं जैन धर्म है। आदि ब्रह्माण तीर्थंकर ऋषभ देव ने दयामूलक धर्म का निर्माण या प्रवर्तन किया। जो दया से विशुद्ध हो वही धर्म है, जीवों की रक्षा ही धर्म है, अहिंसा आदि लक्षण जिसमें पाए जाए वहीं धर्म है। विधान के 15 वें दिन 100 परिवारों ने भाग लेकर पुण्य अर्जित किया। बुधवार को मांडले पर अर्घ्य समर्पित किए गए। संध्याकाल भगवान की आरती व रात...