वाराणसी, नवम्बर 20 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। राजघाट स्थित वसंत महिला महाविद्यालय में 'टेराकोटा कला: वर्तमान चुनौतियां एवं संभावनाएं' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी गुरुवार को शुरू हुई। मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी रहे। उन्होंने कहा कि टेराकोटा जैसी लोक आधारित कलाएं भारत की जीवित सांस्कृतिक विरासत हैं। कुलपति ने विशेषज्ञों का आह्वान किया कि मृत्तिका कला की विभिन्न विधाओं के दस्तावेजीकरण, शोध और संरक्षण को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि इनके लिए आधुनिक संस्थागत सहयोग की जरूरत है। स्वागत उद्बोधन में प्राचार्या प्रो. अलका सिंह ने कहा कि कला, समाज और इतिहास को जोड़ने वाली काशी की मृत्तिका परंपरा के संरक्षण के लिए शिक्षा, शिल्प और समुदाय का समन्वित सहयोग अनिवार्य है। प्रो. राजीव जायसवाल ने मृण्मूर्ति कला को केव...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.